"पिछले दस सालों से मैंने गुड़गांव में कईं मेडिकल परियोजनाएं की हैं, इसी सोच के साथ कि किस तरह से मैं भारतीय समुदाय के, खासकर पढ़े-लिखे मिडिल-क्लास समुदाय के स्वास्थय को बढ़ावा दे सकूँ। इन्ही परियोजनाओं के दौरान मुझे अक्सर अपने स्टाफ से एक के बाद एक कहानियां सुनने को मिलती रहती थी, जिनमें लोगों की हार्ट-अटैक (दिल का दौरा) से अचानक ही मृत्यु हो गयी।
मैं ये सब सुनकर बहुत हैरान हुआ हूँ। यू.स.ए. में अपनी तीस साल की मेडिकल-प्रैक्टिस के दौरान मैंने कभी ऐसा केस नहीं देखा जिसमें तथाकथित "अचानक_मृत्यु" (sudden-death) हुई हो। अगर कभी किसी की हार्ट-अटैक से मृत्यु हुई भी, तो वह हमेशा ही प्रत्याशित थी। यू.स.ए. में होने वाली हर मौत के डेथ-सर्टिफिकेट (मृत्यु-प्रमाणपत्र) पर किसी MD/डॉक्टर के हस्ताक्षर होने अनिवार्य हैं। अपनी प्रैक्टिस के दौरान मैंने एक महीने में 20 डेथ- सर्टिफिकेटों पर हस्ताक्षर किये हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर लोग 80 या 90 साल के आयुवर्ग के थे।
अपनी रिसर्च के दौरान मुझे यह स्पष्ट था कि इन सभी लोगों में एक चीज़ समान थी; रेड-फ्लैग संकेत (red-flag sign) जैसे कि- गतिहीन जीवनशैली (sedentary lifestyle), धूम्रपान, शराब का सेवन, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल इत्यादि या फिर कईं सालों तक किसी डॉक्टर से परामर्श न लेना और ज़रूरी टेस्ट्स न करवाना। अगर हमें डायबिटीज़ या ब्लड-प्रेशर या फिर कोई और मेडिकल-परिस्थिति है, हमारे पास हमेशा उस स्थिति को जानने का पर्याप्त समय होता हैं और इन स्थितियों से अचानक-मृत्यु का खतरा बिल्कुल भी नहीं होता है।"